ये कहानी है एक ऐसे इंसान कि जिसने अपनी जिंदगी मे बहुत कुछ पा लिया था, एक छोटी सी उम्र मे एक बहुत बडी़ करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी थी।

सब कुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन एक ऐसा तुफान आया उसक़े जिंदगी में की सब कुछ ख़तम हो गया। उसकी बनायी हुई करोड़ों की कंपनी, बैंक बैलेंस, घर सब कुछ डूब गया। ऊपर करोड़ों का कर्जा भी आ गया।

इन सब चीजों से बेचैन उस अदमी को कुछ सूझ नहीं रहा था तो वो एक दिन एक बगीचे में जाकर बैठ गया और उन सारी बातों को सोच सोच कर रोने लगा।

उसी बगीचे में बैठा एक बूढ़ा व्यक्ति इस इंसान को बडी़ देर से देख रहा था, बूढ़े व्यक्ति से उस इंसान का रोना देखा नहीं गया और वो उसके पास आकर उससे पूछने लगा की बेटा क्या हुआ है तुम इतना रो क्यों रहे हो।

उस इंसान ने बात को बताना जरूरी नहीं समझा और कहा – “नहीं बाबा कुछ खाश नहीं”।

बूढ़े ब्यक्ति ने उस इंसान को अपना पन दिखाकर उससे बोला बेटा जो भी बात हो तुम मुझे बता दो, इससे तुम्हारा दर्द भी हलका हो जयेगा और सायद मैं तुम्हारी कुछ मदद भी कर सकूँ।

उस इंसान ने उस बूढ़े व्यक्ति को अपनी सारी बात विस्तार से बतायी और रोने लगा। बूढ़े व्यक्ति को उसपर दया आ गयी और उसने उस इंसान को 50 लाख का एक चेक sign कर के दिया और बोला जाओ फिर से अपना काम शुरू करो और अगर तुम्हारे पास पैसे आ जाये तो मुझे लौटा देना।

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उस इंसान ने उस बूढ़े ब्यक्ति से पूछा आखिर मैं आपको पैसे लौटाने के लिये ढूँढूँगा कहाँ, बूढ़े व्यक्ति ने जवाब दिया – जब तुम्हारे पास पैसे आ जाये तो तुम इसी जगह पर आकर मुझे याद करना और मैं आ जाऊँगा।

इतना कहकर वो बूढ़ा व्यक्ति वहा से चला गया।

बूढ़े व्यक्ति के जाने के बाद, उस इंसान ने उस चेक को देखा तो उसे पता चला कि, जिसके साथ उसने अभी एक घंटे बिताये और बात किये वो कोई और नहीं हिंदुस्तान के एक सबसे बड़े दिग्गज उद्द्योग्पति रतन टाटा थे।

यह बात जानकर उस इंसान को झटका भी लगा और खु़शी भी हुई, और उसने सोचा कि जब लोगों को मुझपर इतना विस्वास है तो मुझे क्यूँ नहीं और उसने ठान लिया कि इन पैसों में से बिना एक पैसे खर्च किये मैं फिर से अपना साम्राज्य खड़ा करूँगा।

घर जाकर उस 50 लाख के चेक को अपने कमरे में फ्रेम करवाके रख दिया और इतना मेहनत किया कि केवल 6 महीनों में उसने पहले से ज्यादा बड़ा एक बिजनेस खड़ा कर दिया।

6 महीने बाद वो 50 लाख का चेक लेकर उसी जगह पर गया जहाँ उस बूढ़े व्यक्ति ने उसे पैसे दिये थे।

वो बूढ़ा इंसान वहीं पर घूम रहा था, उस बूढ़े व्यक्ति को देखकर जैसे ये इंसान उसकी तरफ बढ़ा और बूढ़े इंसान के पास पहुचने ही वाला था कि इतने में एक नर्स आयी और उस इंसान को पकड़कर ले जाने लगी।

ये देखकर इस इंसान ने उस नर्स से पूछा कि क्या हुआ है इनको, आप इन्हे पकड़कर क्यों ले जा रहे हो।

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नर्स ने कहा – “ये एक पागल है जिसका 5 साल से इलाज चल रहा है, सिक्यूरिटी गार्ड को चकमा देकर ये पागल खाने से बाहर भाग जाता है और खुद्को रतन टाटा समझकर सबको चेक काट-काट कर देता है।”

ये बात सुनकर, उसके “पैरों तले जमीन निकल गयी।”

और उसे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ ये क्या हो गया है, मैंने एक नकली चेक के सहारे इतनी बडी़ कंपनी खड़ी कर दी।

सीख:

इस कहनी से हमें ये सीख मिलती है कि अगर खुद पर विस्वास हो तो बड़े से बड़ा काम भी चुटकियों में हो जाता है।

इसलिये जो भी काम करें विस्वास के साथ करें।

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