rabbit and turtoise story in hindi
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Rabbit and Tortoise Story in Hindi – खरगोश और कछुए की रेस

आप सबने कछुए और खरगोश की कहानी तो जरूर सुनी होगी, आपका तो पता नहीं मैंने तो इसे कई बार सुनी है और जितनी बार सुनता है, ये मुझे एक नयी सीख देकर जाती है | इसी कहानी को आज मैं आपके सामने शेयर करने जा रहा हु कुछ नए तरीके से, तो हमारे साथ इस post में बने रहिये और इस बेहतरीन कहानी का आनंद उठाइये | अंत में कमेंट सेक्शन में हमें जरूर बताये की आपको  ये कहानी कैसी लगी और आपने इससे क्या सीखा | 

हम सब को पता है की घरगोश की जो रफ़्तार होती है वो बहुत तीव्र होती है और इसी बात को लेकर घरगोश को एक बार बहुत घमंड हो गया जो की बहुत गलत बात है, और इसी बात को लेकर वो अपने आस पास रहने वाले (धीमे चलने वाले) कछुओ को चिढ़ाने लगा और उनका मजाक उड़ाने लगा |

कछुओ की झुण्ड में जो उनका leader था उसे ये बात सही नहीं गयी और उसने खरगोश को अपने साथ दौड़ लगाने की चुनौती दे डाली | ये बात सुनकर खरगोश जोर-जोर से हंसने लगा और कहा की मुझे ये चुनौती स्वीकार है | 

और दोनों दौड़ लगाने के लिए एक जगह पर आकर  खड़े हो गए और जैसा कि सबको पता था, दौड़ शुरू होते ही खरगोश कछुए से कोशों आगे निकल गया | 

खरगोश दौड़ते-दौड़ते एक जगह पर जाकर रुक गया और पीछे मुड़कर कछुए को देखने लगा लेकिन कछुआ अभी उसे नजर नहीं आ रहा था | ये देखकर खरगोश ने सोचा कि जबतक कछुआ आता है तबतक मैं थोड़ा आराम कर लेता हूँ | और वो एक पेड़ के नीचे जाकर लेट गया, थोड़ी ही देर में खरगोश को नींद आने लगी और वो एक गहरी नींद में सो गया और जब जगा तो उसने देखा की कछुआ उससे पहले सीमा लाइन पर पहुंचकर उसका इंतजार कर रहा है | मतलब कछुआ जीत गया और खरगोश हार गया | 

दोस्तों खरगोश यहाँ अपनी वजह से नहीं बल्कि अपने अहंकार की वजह से हारा, कछुए को कमजोर समझने की गलती से हारा | खुद पर विश्वास रखना अच्छा है लेकिन दुसरो को नीचे दिखाना अच्छा नहीं है |  

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की कभी भी किसी भी बात पर घमंड नहीं करनी चाहिए और न ही किसी दूसरे के weaknesses का मजाक उड़ाना चाहिए | 

तो ये तो थी original story, लेकिन इसी स्टोरी एक बहुत बड़े Monk और वक्ता गौर गोपाल दास जीने कई तरीको से बिभिन्न Scenarios को imagine करके पेश किया है जो अब मैं यहाँ आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ |

Scenario -1 Slow and Steady Vs. Fast and Steady

तो गौर गोपाल दास जी की कहानी शुरू होती है हमारी पहली और ओरिजिनल कहानी के ख़त्म होने के बाद जहाँ खरगोश कछुए से हार जाता है और निराश होकर एक जगह बैठकर खुद को कोशता है की मैं क्यों सो गया था | लेकिन एक बात खरगोश को पता था की अगर वो सोता नहीं तो वो जीत जाता और उसने एक बार फिर कछुए को रेस के लिए चुनौती दी और क्योकि कछुआ इस बार बहुत confident और जोश से भरा हुआ था इसलिए उसने बिना कुछ सोचे हाँ कर दी | 

दोनों starting point पर आकर खड़े हो गए और रेस शुरू हुई तो इस बार खरगोश ने कछुए को बहुत बुरी तरह और बहुत बड़े अंतर के साथ हराया | 

इससे हमें ये सीखने को मिलता है कि slow and steady होना अच्छा है लेकिन fast and steady  हमेसा slow and steady को हराकर आगे बढ़ जायेगा इसलिए अगर life में जल्दी आगे बढ़ना चाहते हो तो fast and consistent बनो | दूसरी सीख ये मिलती है की past में की हुई गलतियों को सुधारा जा सकता है बस उसको एक अच्छे नजरिये से देखने की जरुरत है |  

Scenario -2 Identify Your Strengths

इस बार जब कछुआ हारता है तो उसे समझ में आता है कि पिछली बार मैं खरगोश की गलती की वजह से जीत गया था नहीं तो नहीं जीतता इसलिए अगर मुझे खरगोश को हराना है तो कोई दूसरी तरकीब सोचनी पड़ेगी क्योकि इस तरह तो मैं इसे नहीं हरा पाउँगा | 

और कछुए ने एक बार फिर खरगोश को दौड़ के लिए चुनौती दी लेकिन इस बार कछुए ने एक शर्त रखी और वो ये कि इस बार दौड़ का रास्ता वो खुद तय करेगा, खरगोश ने कहा ठीक है मुझे कोई तकलीफ नहीं है | 

और दोनों में रेस शुरू हो गयी, खरगोश फिर खूब तेजी से दौड़ा और भागते-भागते वो रास्ते में एक नदी के किनारे जा पहुंचा जो उसके लिए पार कर पाना नामुमकिन था और कछुआ धीरे-धीरे चलते-चलते लक्ष्य तक पहुँच गया और रेस को जीत गया | 

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है  कि अपने अंदर के strengths और अपने competitor के weaknesses को पहचानो और फिर उससे compete करो | 

Scenario -3 Team Work

इतनी बार रेस लगाते-लगाते अब दोनों कछुआ और खरगोश एक अच्छे मित्र बन गए और एक आखिरी बार दोनों ने रेस लगाने की सोची, लेकिन इस बार की रेस वो एक competitor की तरह नहीं बल्कि एक team की तरह लगाने जा रहे थे | 

दोनों रेस start होने वाली सीमा पर आकर खड़े हो गए और खरगोश कछुए को अपनी पीठ पर बिठाकर दौड़ने लगा और दौड़ते-दौड़ते वो नदी किनारे जा पहुंचा और अब यहाँ से कछुए ने खरगोश को अपने पीठ पर बिठा लिया और फिर जब दोनों नदी से बहार निकले तो फिर से  खरगोश ने कछुए को पीठ पर बिठा लिया और जल्दी से दौड़कर लक्ष्य पर पहुँच गए | 

इस बार दोनों लक्ष्य पर पहुँचने से बहुत खुश थे, इतना खुश वो पहले कभी भी नहीं थे | 

इसीलिए कहा जाता है कि काम हमेसा teamwork में करना चाहिये , जो काम आप टीम में रहकर एक दूसरे का हाथ बांटकर कर सकते हो वो अकेले कभी नहीं कर सकते| 

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